Thursday, September 25, 2014

Truth Of AIMIM Party & Owaisi Brothers :

AIMIM और औवेसी भाईयो का सच :

AIMIM पार्टी हैदराबाद रियासत के दिनों की है. इसकी स्थापना हैदराबाद के गद्दार निजाम नवाब मीर उस्मान अली खान की सलाह से निजाम समर्थक पार्टी के रूप मे  1927 में ULMA -E-Mashaeqeen की उपस्थिति में हैदराबाद राज्य के  महमूद नवाज खान किलेदार  द्वारा हुई थी और तब  यह  केवल मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) थी। इसकी  पहली बैठक 12 नवंबर 1927 को नवाब महमूद नवाज खान के घर में आयोजित की गयी थी ।
MIM भारत के साथ एकीकरण की विरोधी थी इसका उद्देश्य स्वतंत्र मुस्लिम राज्य बनाना था !!
1938 मे बहादूर यार जंग इसके अध्यक्ष चुने गये । बाद मे ब्रिटीश भारत मे इसका मुस्लिम लीग (जो शुरू से  धार्मिक आधार पर अलग पाकिस्तान की माँग कर रही थी ) के साथ इसका गठबंधन हो गया ।
भारत के साथ विलय का विरोध करने के उद्देश्य से एक मुस्लिम अलगाववादी  संगठन  (The Razakars ) को MIM के साथ जोड़ा गया । तक़रीबन 150000 -200000 सशस्त्र मुस्लिम अलगाववादीयो  को भारतीय सेना के साथ लड़ाई और स्वतंत्र हैदराबाद बनाने के लिये तैयार किया गया था.

लेकिन सरदार पटेल की सुझबूझ और त्वरित निर्णय से गद्दारो के मंसुबो पर पानी फिर गया । पटेल जी बदौलत भारत हैदराबाद का विलय करने मे सफल रहा । हैदराबाद के भारत मे विलय के साथ ही 1948 मे इस नापाक संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया । इसके तत्कालीन नेता कासिम रिजवी को जेल मे डाल दिया गया । 1957 मे कासिम रिजवी भारत सरकार के सामने रिहाई के लिये गिड़गिड़ाया उसे तुरंत भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने की शर्त पर 1957 मे रिहा किया गया

अब सवाल यह आता है कासिम रिजवी कौन था?

हैदराबाद रियासत मे बेशक निजाम का शासन था लेकिन वहाँ की जनसंख्या हिन्दू बहुल थी । कासिम रिजवी उच्च न्यायालय का वकील और निजाम का करीबी सहयोगी सलाहकार था जिसने हैदराबाद मे स्वतंत्र मुस्लिम शासन का सदैव समर्थन किया  इसलिये उसने सशस्त्र मुस्लिम अलगाववादी सेना(The Razakars ) तैयार की

पाकिस्तान मे विलय असंभव और हिन्दू बहुल राज्य होने के कारण हैदारबाद को स्वतंत्र मुस्लिम राज्य बनाने हेतु  रिजवी ने निजाम को कट्टरपंथी रास्ता चुनने के लिये तैयार किया  और अलगाववादी सेना को हिन्दूओ को प्रताड़ित करने का आदेश दिया उसका साफ मानना था कि जो कोई  विरोध करे उन्हे मार दिया जाये

ऐसे मुसलमान और दुसरे  लोग जिन्होने भारत के साथ विलय समर्थन किया और रिजवी का विरोध किया उन्हे मार दिया गया
रिजवी के इशारे पर हिन्दूओ को मारा गया लूटा गया औरतो के साथ बलात्कार किये गये और इसके लिये बाकायदा उसने अपनी  अलगाववादी सेना को आदेश देकर अभियान चलाया ताकि हैदराबाद से हिन्दूओ का नामोनिशान मिटाया जा सके

रिजवी जो कि MIM के संस्थापको मे से था बहादूर यार जंग की मौत के बाद इसका अध्यक्ष बन गया
सरदार पटेल के साथ रिजवी की दिल्ली मे एक बैठक हुई और पटेल की पारखी नजरो ने तत्काल रिजवी के मंसुबो को पढ़ लिया और भारतीय सेना को आपरेशन पोलो का आदेश दे दिया जिसमें रिजवी और उसकी अलगाववादी सेना को मुँह की खानी पड़ी । रिजवी को जेल मे डाल दिया गया 1957 मे भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने की शर्त पर रिहा किया गया
पाकिस्तान जाने के पहले कासिम रिजवी ने MIM (मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन ) की जिम्मेदारी अब्दुल वाहिद औवेसी को सौंप दी जिसकी मृत्यु के बाद उसका बेटा सल्लाहुद्दिन औवेसी ने 1975 मे इसका कार्यभार संभाला । अब इसका नाम AIMIM ( आल इंडिया मजलिसें इत्तेहादुल मूसलमीन) हो गया । सल्लाउद्दीन औवेसी को पार्टी के सलार -ए -मिल्लत (मुस्लिम समाज का प्रमुख ) से नवाजा गया।

सलाउद्दीन औवेसी  :

सलाउद्दीन औवेसी का जन्म  14-2-1931 को हुआ था । सलाउद्दीन के तीन बेटे असद्दूदीन  औवेसी, अकबरुद्दीन औवेसी और बूरहानुद्दीन औवेसी हुए और एक बेटी हुई जिसकी शादी सलाउद्दीन के भतीजे अमीनूद्दीन औवेसी से हुई !!!!

सलाउद्दीन औवेसी लगातार (84-99) तक छ बार सासंद चुना गया । इसके पहले लगातार दो बार विधान सभा के लिये चुना गया 1978 और 1983)

सलाउद्दीन का अक्सर अपने भाषणों मे मुसलमानों को भड़काता था ।  मुसलमानों को गुमराह करने के लिये कहता था कि मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है मुसलमानों को अपने हक के लिये लड़ना चाहिये और अपने पैरो पर खड़ा होना चाहिये वह देश और राज्यों पर मुसलमानों की अनदेखी का झूठा आरोप अक्सर अपने भाषणों मे लगाकर भोलेभाले मुसलमानों को भड़काता था । यही कारण है मुसलमान बहकावे मे आते गये और वह एक कट्टर मुस्लिम नेता के रूप मे उभर कर सामने आया जिसने धीरे धीरे पूरे आंन्ध्रा मे अपना प्रभाव फैलाने शूरू कर दिया । नफरत की राजनीति मे सलाउद्दीन ने अपना सिक्का पूर्ण रूप से जमा लिया और मुसलमानों को अपने इशारे पर नाचने वाला वोटबैंक बना लिया   28-09-2008 को सलाउद्दीन औवेसी की मृत्यु हो गयी

मौलाना अब्दुल वाहिद औवेसी  :

कहा जाता है कासिम रिजवी ने जब   मौलाना अब्दुल वाहिद औवेसी को जब मजलिसें इत्तेहादुल मुसलमीन सौपा उस वक्त रिजवी ने कहा था कि स्वतन्त्र मुस्लिम राज्य का मेरा सपना अधूरा है जिसे तुमको पूरा करना है
असल मे वाहिद औवेसी को MIM सौंपने के पीछे सबसे बड़ा कारण भी यही था की वाहिद औवेसी कट्टर हिन्दू और भारत विरोधी था ।
भारत  के विरुद्ध जहर उगलना औवेसीयों के लिये नयी बात नहीं है असल मे इनकी पूरी बुनियाद ही भारत और हिन्दू विरोध पर टिकी है ।

अब्दुल वाहिद औवेसी को भारत विरोधी भाषण देने के कारण 14 मार्च 1958 मे जेल मे डाला गया था
जहाँ वह 11महिने से अधिक जेल मे रहा
अब्दुल वाहिद औवेसी को हैदराबाद पोलिस के आदेश पर 3(1) उपधारा (2) Preventive Detention Act, 1950 के तहत गिरफ्तार किया गया था ।
वाहिद औवेसी को उसके  5  ओक्टोबर ,12 ओक्टोबर ,23 ओक्टोबर ,24th ओक्टोबर  1957  और 15 नवम्बर  1957 और 9 जनवरी 1958 को दिये गये भाषणों मे  साम्प्रदायिक भावनाएँ भड़काने, सामाजिक द्वेष फैलाने और मुसलमानों को गैर मुस्लिमों और राज्य के विरूद्ध  हिंसा के लिये उकसाने,  समाज मे आतंक हिंसा और नफरत फैलाने के आधार पर गिरफ्तार किया गया था  । 
अब्दुल वाहिद औवेसी को जब गिरफ्तार किया गया तब वह तत्कालिन MIM का अध्यक्ष था । कासिम रिजवी को 17 सितंबर 1957 को 48 घंटे मे भारत छोड़ने की शर्त पर रिहा किया गया ।
18 सितंबर 1957 को अब्दुल वाहिद औवेसी ने MIM का नाम बदल कर AIMIM कर दिया और लोगो को भड़काने का काम शुरू कर दिया ।
सरदार पटेल ने MIM पर प्रतिबंध लगाया था लेकिन देश के सबसे बड़े बेवकुफ और रंगीन मिजाज नेता तथाकथित चाचा नेहरू ने MIM पर से प्रतिबंध हटा लिया

सल्लाउद्दीन औवेसी ने अब्दुल वाहिद औवेसी की गिरफ्तारी को 20 जून 1958 को आन्ध्रा प्रदेश उच्च न्यायालय मे चुनौती दी जिसे उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 22(5) के तहत गिरफ्तारी को सही ठहराते हुए  1 अगस्त 1958 को खारिज कर दिया

अब्दुल वाहिद औवेसी ने मुस्लिम संगठन MIM को पुनर्जिवित करने के लिये काफी प्रयास किये लेकिन अपने नापाक मंसूबो मे कामयाब नहीं हो पाया
अब्दुल वाहिद औवेसी के मरने के बाद सल्लाउद्दीन औवेसी 1976 मे AIMIM का अध्यक्ष बना
असद्दूदीन औवेसी सलाउद्दीन औवेसी और नजमूनिशा का सबसे बड़ा बेटा है

असद्दूदीन की दो शादियाँ हुई वर्तमान फरहीन औवेसी है जिसके साथ 1996 मे शादी हुई

असद औवेसी अपने बाप से भी दो कदम आगे है । यह हिन्दू विरोधी अक्सर अपने भाषणों मे हिन्दूओ के विरूद्ध जहर उगलता रहता है । इस पर कई भड़काऊ भाषण देने के मामले दर्ज है और कई मामलो मे गिरफ्तार भी किया जा चुका है । आपराधिक पृष्ठभूमि का यह व्यक्ति मुसलमानों मे हिन्दूओ के विरूद्ध जहर भरने का कोई मौका नहीं छोड़ता

सल्लाउद्दीन का दुसरा बेटा और असद औवेसी का छोटा भाई भी अपने बाप दादा के नक्शे कदम पर ही चल रहा है बल्कि उनसे भी दो कदम आगे है

दोनो भाई अक्सर  मुसलमानों को हिन्दूओ के खिलाफ भड़काते रहते है
अकबर औवेसी जैसा दो कौड़ी का चिंदी चोर अपने ही घर मे किराये की भीड़ के सामने शेर बनकर दहाड़ने की कोशिश करता रहता है , अकबरूद्दीन औवेसी कहता है - मैं सिर्फ मुस्लिम परस्त हूं, उसे अजमल कसाब को फांसी दिये जाने का सख्त अफसोस है, वह टाइगर मेनन जैसे आतंकी का हमदर्द है, वह मुम्बई के बम धमाकों को जायज ठहराता है, देश के मुम्बई संविधान, सेकुलरिज्म और बहुलतावादी संस्कृति की खिल्ली उड़ता है। कहता है, हम तो दफन होकर मिट्टी में मिल जाते है मगर हिन्दू जलकर फिजा में आवारा की तरह बिखर जाते है, वह देश के दलितों व आदिवासियों को दिये गये रिजर्वेशन पर सवाल खड़े करता है और इन वर्गों की काबिलियत पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है।

औवेसी की नजर में भारत जालिमों का मुल्क है, दरिन्दों का देश है, जहां पर मुसलमान सर्वाधिक सताये जा रहे है, उसने गुजरात से लेकर आसाम तक के उदाहरण देते हुये आदिलाबाद की सभा में मौजूद लोगों को उकसाया कि हमसे मदद मत मांगों खुद ही हिसाब बराबर कर दो, बाद में हम सम्भाल लेंगे।

इस आस्तीन के साँप को बहुत सारे हिसाब चाहिए, अयोध्या का बदला चाहिये, गुजरात का प्रतिरोध चाहिये, खुलेआम खून खराबा चाहिये, मुस्लिम राज्य चाहिये , हद तो यह है कि देश के खिलाफ जंग छेड़ने की धमकी देते हुये वह मुल्क के अन्य धर्मों के लोगों को ‘‘नामर्दों की फौज’’ कहता है, और राम को राम जेठमलानी के बहाने इतिहास का ’सबसे गंदा आदमी बताता है जो औरतों का एहतराम नहीं करता था।’

औवेसी की ख्वाहिश है कि महज 15 मिनट के लिये इस मुल्क से पुलिस हटा ली जाये तो वो हजार बरस के इतिहास से ज्यादा खून खराबा करने की ताकत रखता है और देश के 25 करोड़ मुसलमान इस देश का इतिहास बदलने की हिम्मत!!!!!! बकौल औवेसी तबाही और बर्बादी हिन्दुस्तान का नसीब  बन जायेगा। ऐसा ही प्रलाप, भाड़े के टट्टूओं की भीड़ में, अल्लाह हो अकबर के उन्मादी नारों के बीच में आंध्रप्रदेश असेम्बली के इस विधायक ने किया, उसने पूरे मुल्क को एक बार नहीं कई-कई बार ललकारा, जिसकी जितने कड़े शब्दों में निन्दा की जाये वह कम है। औवेसी को अपना ‘एक कुरान, एक अल्लाह, एक पैगम्बर, एक नमाज,‘ होने का भी बड़ा घमण्ड है, उसके मुताबिक बुतपरस्तों के तो हर 10 किलोमीटर पर भगवान और उनकी तस्वीरें बदल जाती है, इस मानसिक दिवालियेपन का क्या करें, कौन से पागलखाने में इस पगलेट को भेजे जो उसे बताये कि ‘तुम्हारा एक तुम्हें मुबारक, हमारे अनेक हमें मुबारक’ लेकिन औवेसी, हबीबे मिल्लत, पैगम्बर की उम्मत, यह तुम्हारा प्राब्लम है कि तुम्हारे पास सब कुछ ‘एक’ ही है, क्योंकि बंद दिमाग न तो महापुरूष पैदा करते है और न ही दर्शन, न पूजा पद्धतियां विकसित होती है और न ही ढेर  सारी किताबें मुकद्दस। वे बस एक से ही काम चलाते हैं बेचारे, अनेक होने के लिये दिमाग की जरूरत होती है, धर्मान्ध, कट्टरपंथी लोगों का मस्तिष्क ठप्प हो जाता है, वे नयी सोच, वैज्ञानिक समझ, तर्क और बुद्धि विकसित ही नहीं कर पाते है, खुद नहीं सोचते, सिर्फ उनका अल्लाह सोचता है, वे सिर्फ मानते है, जानते कुछ भी नहीं, इसलिये नया कुछ भी नहीं होता, सदियों पुरानी बासी मान्यताएं दिमाग घेर लेती है और हीनता से उपजी कट्टरता लोगों को तालिबानी बना देती है।

यह बात अलग है कि जब इस गंदी नाली के कीड़े को जेल मे डाला जाता है तो इसकी सारी हेकड़ी निकल जाती है और ये अपने बयानो मे बकरी की तरह मिमियाते हुए कहता है मेरे ऊपर बूरी आत्मा का साया आ गया था उसने मेरे से ये सब कहलवाया था अब इस गधे से कोई पुछे की वो बूरी आत्मा का साया क्या तेरे बाप का था और तो जब जेल मे डाला गया तो अंदर पिशाब तक जनाब ने कर दिया फिर भी ख्वाब 100 करोड़ हिन्दूओ को मिटाने के देखता है ।

अकबर औवेसी वही दलीले अपने भाषणों मे देता है जो कासिम रिजवी दिया करता था । अगर इस सूअर को कासिम का वर्तमान संस्करण कहे तो गलत नहीं होगा

अकबरुद्दीन औवेसी की शक्ल में कासिम रिज़वी की विरासत हैदराबाद में अभी ज़िंदा है। जबकि असलियत ये  है कि आंध्र से बाहर अभी मजलिस को कोई मुसलमान घास नहीं डालता।
ये नफरत के सौदागर और हिन्दू विरोधी, भारत विरोधी अक्सर जहर उगलते है । लेकिन ये ऐसा कर सकते है क्योंकि इसके पीछे देश की सेकुलर लोबी का सबसे बड़ा हाथ है जिन्हें सिर्फ  मुस्लिम वोटो की चिंता है देश चाहे अपमान का धुंट पीये या हिन्दू पल पल मरता रहे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और इस सब मे सबसे बड़ा हाथ है देश की सबसे बड़ी गद्दार पार्टी कोंग्रेस का

असल मे मित्रो, जब तक सरदार पटेल गृहमंत्री रहे तब तक उनके आदेश पर MIM पर 1948 से 1957 तक प्रतिबन्ध रहा, इसके सभी प्रमुख लोगो को जेल में डाल दिया गया था  लेकिन 1957 में जब जवाहर लाल नेहरु दूसरी बार भारत के प्रधानमन्त्री बने तो उन्होंने देश को बांटने वाली इस पार्टी MIM पर से प्रतिबन्ध उठा लिया  और इसे एक राजनैतिक दल की मान्यता जबरदस्त विरोध के बावजूद दिलवा दी .. !!
प्रतिबन्ध उठने के बाद हैदराबाद में मुसलमानों ने MIM का बैठक बुलाया और एक कट्टर मुस्लिम अब्दुल वाहिद ओबैसी जिसके उपर कई कई आपराधिक केस दर्ज थे उसे MIM का चीफ बनाया गया फिर बाद में वाहिद के बेटे सुल्तान सलाहुद्दीन ओबैसी ने MIM की कमान सम्भाली .. सलाहुद्दीन ओबैसी और इंदिरा गाँधी में बहुत ही ज्यादा निकटता थी , इस निकटता के पीछे भी बहुत रोचक कहानी है – इंदिरा गाँधी ने सलाहुद्दीन ओबैसी को हर तरह से मदद दिया उसे खूब पैसा भी दिया गया मकसद एक ही था की किसी भी कीमत पर आंध्रप्रदेश में तेजी से लोकप्रिय नेता के तौर पर उभर रहे फिल्म अभिनेता एनटी रामाराव को रोका जाये ,, एन टी रामा राव को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी ने बहुत ही गंदा खेल खेला जिसकी कीमत देश आज भी चूका रहा है ,, इंदिरा गाँधी ने MIM से गठबन्धन करके उसे तीन लोकसभा और आठ विधानसभा सीट पर जीत दिलाकर एक बड़ी राजनितिक ताकत दे दी और साथ ही आजाद भारत में सांप्रदायिक विद्वेष के लिये मशहूर अलगाववादी हत्यारा ताकतों को केंद्र तक का सीधा रास्ता प्रदान कर भारत में मुस्लिम अलगाववाद को फिर से हवा दी..!!

2008 में सुल्तान सलाहुद्दीन ओबैसी के मरने के बाद उसका बड़ा बेटा असद्दुदीन ओबैसी MIM का चीफ बना .. और मजे की बात ये है की आज भी इस देशद्रोही और गद्दार ओबैसी खानदान की गाँधी खानदान से दोस्ती बदस्तूर जारी है और आज दोनों ओबैसी भाई राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के अच्छे दोस्तों में शुमार किये जाते है..!!

AIMIM के सफ़र का अध्ययन करने पर कोई भी इस नतीजे पर पहुँच सकता है कि इसमें कांग्रेस का कितना बढ़ा हाथ है? कांग्रेस के समर्थन और गठबंधन के बिना मजलिस का विधान सभा में पहुँचना संभव न था। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता ने देश को एक से बढ़कर एक कद्दावर लम्पट नेता दिए हैं।
आज अकबरुद्दीन आदिलाबाद में जिस बेअदबी के साथ भारत का अपमान करता है  क्या वह संभव होता यदि उसके बाप  सलाहुद्दीन को सांसद बनवाने में कांग्रेस ने अतीत में मदद न की होती ?

कांग्रेस के दिशाहीन और मूल्यरहित राजनीतिक व्यवहार ने देश की राजनीति को बहुत नुकसान पहुँचाया है, केरल में कम्युनिस्टों के खिलाफ मुस्लिम लीग से समझौता करना उसके वैचारिक दिवालियेपन और राजनीतिक अवसरवाद का परिणाम है जिससे देश की दक्षिण पंथी ताकतों को उसपर हमला करने का अवसर मिला बल्कि मुस्लिम कट्टरपंथी ताकतों को पैर जमाने का मौक़ा मिला।

एक बार जेल मे बंद होते ही कोर्ट परिसर मे ही पेंट के अंदर मुत देने वाले अकबर औवेसी को शायद यह पता नहीं है कि जिन 100 करोड़ हिन्दूओ खत्म करने का सपना वो देख रहा है वो 100 करोड़ हिन्दू अगर एक साथ मुतेंगे तो पूरी कौम सहित बहते हुए पाकिस्तान पहुँच जाओगे

लेकिन एक बात जो सत्य है कि ऐसे लोगो को नजरंदाज करना बहुत बड़ी बेवकूफी होगी क्योकि अब देश मे कोई पटेल नहीं है जो ऐसे साँपों के विषैले फन कुचल डाले इस वक्त देश मे सेकुलरीज्म का खेल चल रहा है ऐसे मे कोई भी ये जोखिम मोल नहीं लेगा की उसका वोट बैंक टूटे । अकबर औवेसी जैसे लोग और AIMIM जैसे संगठन समाज और देश मे कोढ़ के समान है इन पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना जरूरी है ।

AIMIM संगठन आज का नही है बरसो पूराना संगठन है जिसने हमेशा मुस्लिम परस्त राजनीती की है और सदैव भारत के विरूध जहर उगला है  जो आज तक बदस्तुर जारी है

Saturday, January 4, 2014

आम आदमी का पत्र

माननीय श्री अरविन्द केजरीवाल
मुख्यमंत्री दिल्ली

मुख्यमंत्री बनने की बधाई. 
CM साहब मै एक आम आदमी हुँ, नौकरी पेशा हुँ, मेहनत करके अपनी आजिविका चलाता हुँ| आप मुख्यमंत्री बने आपने कहा कि पहली बार एक आम आदमी मुख्यमंत्री बना है| यकिन मानिए बहुत खुशी हुई ये जानकर कि आम आदमी मुख्यमंत्री बना है ऐसा लगा जैसे मै स्वयं मुख्यमंत्री बन गया हुँ |

आम आदमी हुँ इसलिये आम आदमी वाली कमजोरी भी है मुझमें,कमबख्त सपने बहुत जल्दी देख लेता है | आपके मुख्यमंत्री बनते ही मैने भी बहुत से सपने देख लिये थे |

जैसे कि पहले मुझे पता ही नहीं था कि आम आदमी भी स्पेशल मैट्रो ट्रेन लेकर चल सकता है सिर्फ अपने लिये!!!!!!!!!!!!
वो तो तब पता चला जब आप शपथ के लिये मैट्रो से गये| महोदय मुझे भी अगले हफ्ते जाना है कहीं किसी कार्यक्रम मे तो क्या मेरे लिये भी किसी स्पेशल बस का इंतजाम हो सकता है???????
आप बड़े आम आदमी हो और मै छोटा इसलिये मैट्रो की जरूरत नहीं है मै बस से काम चला लूंगा| इसका खर्च नहीं पुछूंगा क्योंकि जैसै आप आम है वैसे ही मै भी आम हुँ जहाँ से आपके मैट्रो का खर्च लगा वही से इस बस का भी लग जायेगा!!!!!!! 

वैसे भी आप ही तो कहते हो कि आम आदमी का हक है यह |
लेकिन एक सवाल यहाँ दिमाग मे खड़ा हो गया कि खर्च कहीं से तो लगा ही है तो लगा कहा से शायद सरकारी खजाने से !!!!!
अब सरकार तो कमाई करती नहीं पैसा तो सारा जनता का ही होता है जो भी खर्च होता है तो क्या इसका मतलब ये मान लु कि आपकी ट्रैन की सवारी मुफ्त की नहीं बल्कि आम आदमी के जेब से कि गयी थी?????

अब सवाल ये भी है कि अगर पैसा आम आदमी का लगा है तो क्या ये स्पेशल ट्रैन ले जाना जरूरी था???????

आप कहते रहे है कि नेता जनता के पैसे का दुरूपयोग करते है तो क्या ये दुरूपयोग या फिजुल खर्ची नहीं थी.   अगर फिजूलखर्च है तो क्यु कि गयी  आप बड़े आम आदमी है तो क्या इतनी सी बात आपके ध्यान मे नहीं आयी??? कैसे आम आदमी है आप?

खैर छोड़िये मै भी कहाँ बात का बतंगड़ बनाने बैठ गया पर क्या करूँ आम आदमी हुँ ना तो आदत भी वही है कि कमबख्त सवाल बहुत पुछता रहता है|  आप से भी भूल हो गयी होगी तो इसमें मेेरा  इतना सवाल करना भी कहाँ जायज है????

लो बात बात मे एक बात तो भुल ही गया मै कि आपकी तबीयत कैसी है वो TV पर बार बार लगातार  बता रहे थे कि आपको खाँसी बहुत हो गयी है. मै तो घबरा ही गया था कि कहीं किसी की नजर तो नहीं लग गयी आपको. मैने तो पंडित जी से भी बात कर ली थी आपके लिये पूजा पाठ कराने कि |
लेकिन हाँ यहाँ भी एक बात और देखने वाली मिली कि पहली बार किसी आम आदमी कि खाँसी पुरे मिडिया चैनलो पर लगातार तीन दिन तक दिखाई गयी थी!!!!!!!!!!! वरना VIP लोगो कि तो रोज दिखाते है|  अरे VIP से याद आया मिडिया वाले भी अपने मतलब के लोगो कि खबर दिखाते है वो अपने अटल जी भी बहुत बीमार है पर कोई न्युज वाला कहा दिखाता है उनका हाल चाल पर हाँ सोनिया जी को जूकाम भी होता है तो जरूर बताते है| खैर अपने को क्या मिडिया वालो का काम है वो जाने किसको दिखाना है किसको नहीं दिखाना आखिर उनको भी तो अपनी दुकान चलानी है!!!!!!!
फिर जब उस दिन विधानसभा मे विश्वासमत वाले दिन आपने कहा ना कि आप अब बिल्कूल ठीक है तो जान मे जान आयी मेरी |
आपने उसदिन एक बात और कही कि भगवान है ये बात का यकिन हो गया तो सर मुझे भी उसदिन यकिन हो गया कि भगवान तो है वरना कहाँ आम आदमी की किस्मत कि उसकी खाँसी TV पर दिखे| मेरे पड़ोसी के बेटे को पिछले बीस दिन से निमोनिया है पर TV तो दुर किसी लोकल अखबार तक मे खबर नहीं आती |
लेकिन आप की खबर मिली तो अच्छा लगा, हाँ  थोड़ा बूरा भी लगा कि अरविन्द जी आम आदमी है फिर भी TV पर खाँसी दिखाई जा रही है और पड़ौसी का बेटा भी आम है पर कोई खबर नहीं दिखी
तब जाके पता चला कि आम आदमी भी दो तरह के होते है एक बड़ा आम आदमी आपकी तरह और दुसरा छोटा आम आदमी हमारी तरह
वैसे सर एक बात पुछू लोग कह रहे थे कि मिडिया वाले बिना पैसे लिये ऐसी फालतू खबरे नहीं दिखाते है तो आप की खाँसी को क्यों इतना दिखा रहे थे आप कोई VIP थोड़े ही हो आप तो हमारे आम आदमी हो!!!!! मिडिया को क्या मिला क्या नहीं वो तो भगवान जाने या देने वाला जाने मुझे क्या करना है
लोग बाते कर रहे थे तो सोचा आपको बता दुं आखिर आम आदमी आम आदमी तो बात नहीं बतायेगा तो किसको बतायेगा |
जाने दिजिये लोग है तरह तरह कि बाते करते रहते है हमे क्या करना है आम आदमी कि ये आदत भी बहुत बूरी होती है ना सर!!!

खैर विश्वास मत जीतने के बाद आप पूरी तरह स्वस्थ लगे ये बात अच्छी लगी |
विश्वास हो गया भगवान है वरना कहाँ दिल्ली के बड़े बड़े डाक्टर जिस खाँसी को 7 दिन तक ठीक नहीं कर पाये उसे भगवान ने एक दिन मे ठीक कर दिया आपको विश्वास मत जीता कर!!!!!!!!

उस दिन वो भाजपा वाले हर्षवर्धन जी आप पर बहुत चिल्ला रहे थे बहुत गुस्सा आया उन पर कि पहली बार कोई आम आदमी कुछ ले दे के CM बना है तो उनका पेट क्यूँ दूख रहा है ?

मानता हुँ कि उनके सवाल जायज थे पर वो कोई टाइम था सवाल करने का?  अरे पूरे पाँच साल पड़े है फिर कभी पुछ लेते पर माने ही नहीं सारे सवाल एक दिन मे ही पुछ डाले उन्होंने ,वो तो अच्छा किया आपने कि उनके किसी सवाल का जवाब ही नहीं दिया

क्यूँ दे जवाब वो तो नेता है और नेता लोग हम आम आदमी को कहाँ जवाब देते है जो आम आदमी जवाब दे उनको अच्छा किया आपने वैसे भी आप बड़े वाले आम आदमी है!!!!!!!!

वो हर्षवर्धन जी पुछ रहे थे कि आपने कसम खायी थी कि कोंग्रेस से किसी तरह का समर्थन ना लोगे ना दोगे.  अदर की बात है मुझे बता दिजीये कि सच है क्या ये मै किसी को नहीं कहूँगा कसम से

और आप तो जानते ही है कि आम आदमी कसम का कितना पक्का होता है कुछ भी हो जाये कमबख्त कसम नहीं तोड़ता और वो भी बच्चो की देवा देवा देवा इतना बड़ा पाप आम आदमी कभी नहीं करता
वैसे भी उनको कसम से क्या मतलब आपने खायी या नहीं खायी
अगर खायी भी है तो कौनसे उनके बच्चो की कसम खायी थी क्या जो उनको बूरा लगा इतना.   अजी सच तो ये है वो खुद मुख्यमंत्री नहीं बन पाये ना इसलिये दुखी हो रहे थे.   जलन हो रही होगी आपसे!!!!!!!!!

और वो अरविन्दर लवली कोंग्रसी उसदिन ऐसा खुश हो रहा था जैसे उसके भाई की शादी हो !

समर्थन का अहसान जता रहा था बार बार तो  मुझे तो लगा कि आप बोलेंगे उसको आम आदमी वाली देशी स्टाईल मे कि ज्यादा अहसान मत जता समर्थन का वरना तुम्हारे  करप्शन की जो फाईले रद्दी मे डलवा रहा हुँ वही सबसे पहले खोलुंगा पर आप तो चुप चाप सुनते रहे !!!
एक बार बोल देते तो उसको भी औकात पता चल जाती |

फिर पड़ौस के चाय वाले ने बताया कि आप अब बड़े आम आदमी बन गये हो राजनीती मे आ गये हो आप की भी मजबूरी है मुख्यमंत्री जो बनना है तब बात समझ आयी कि आप चुप क्यूँ रहे| आखिर सत्ता सुंदरी होती ही ऐसी है कि सब बदल जाता है |

छोड़ो ये बात भी लेकिन सर आपको याद है जब अन्ना ने आंदोलन किया था तो आपने कहा था एक बार कि राजनीतिक पार्टी नहीं बनाओगे ना राजनीति मे आओगे फिर कैसे आ गये आप यहाँ????????   ये बात समझ नहीं आयी मुझे| आप ही बता दो आम आदमी को ये राजनीति वाली बाते समझ नहीं आती!!!!!!

लो बातो बातो मे आपका इतना वक्त बरबाद कर दिया असल मे मेरे दिल मे भी कुछ सवाल है क्या करूँ आम आदमी हुँ ना सवाल बहुत करता रहता हुँ और फिर आम आदमी आम आम आदमी से सवाल नहीं करेगा तो किस से करेगा ?

जानता हुँ जवाब एक का भी नहीं मिलेगा फिर भी सवाल तो करूँगा क्युंकि लोकतन्त्र है सवाल करना हक है मेरा  :-)

01. पहला सवाल आपने कहा कि राजनीतिक दल नहीं बनाओगे ना राजनिती मे आओगे तो क्यों आये राजनिती मे?

अगर आपका जवाब ये है कि राजनीति के दलदल को साफ करने के लिये उसमें उतरना जरूरी होता है तो फिर अन्ना को ये बात क्यों समझ नहीं आयी इतने सालो मे?  क्यों अन्ना और किरण बेदी ने राजनीति मे आने का विरोध किया?
या फिर उनकी समझ कमजोर है आपसे?
अगर उनकी समझ कमजोर है तो आपने पहले उनका साथ क्यों दिया????

यहाँ क्या ये समझा जाये कि आपने उनका इस्तेमाल किया अपने को राजनीति के प्लेटफार्म पर उतारने हेतु????

02. बाबा रामदेव भी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे थे आपके पहले से, तो फिर आप ने उनका समर्थन क्यु नहीं किया?????

क्या आपको डर था कि उनका साथ लेने से आपकी राजनीती मे आने कि सोची समझी हीरो स्टाईल एन्टरी का रंग फिका हो जायेगा क्योकि सारा क्रेडिट तो बाबाजी ले जायेंगे????

03. आपने रामलीला मैदान से लेकर जंतर मंतर, हर मंच हर नुक्कड़ सभा हर मिडिया कोन्फरेन्स मे यहाँ तक अपनी चुनावी सभा मे कहा कि शीला दीक्षित भ्रष्ट है आपके पास सबूत है सत्ता मे आने पर उनको जेल भेजोगे तो फिर सदन मे हर्षवर्धन जी से सबूत मांगने का राज क्या था?????

शायद समर्थन की पहली किस्त अदा कि आपने!!!!!!!!!!!

04. आपने बच्चों कि कसम खायी कि ना समर्थन दोगे ना लोगे तो फिर कोंग्रेस के समर्थन से सरकार क्यूँ बनायी????

05.चुनाव परिणाम आने पर आपने कहा जनता ने बहुमत नहीं दिया सरकार नहीं बनाओगे फिर कोंग्रेस की समर्थन की घोषणा के बाद जनमत करने का नाटक क्यों किया जब सरकार बनानी ही थी तो?????

06.आप हमेशा कहते रहे कि कोंग्रेस भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी पोषक है फिर भाजपा को अछूत बना कर कोंग्रेस का अप्रत्यक्ष साथ लेने का मतलब क्या है???? क्या आप ये  मानते है कोंग्रेस भ्रष्ट नहीं है जितनी आप बताते हो????

07. आपने कहा सरकार बनने के 15दिन मे जनलोकपाल बनाओगे आज शपथ लिये 8 दिन हो गये है अब आप कह रहे है कि 15-20 दिन और लगेंगे जबकि आप जानते हो ये आपके नही केन्द्र के हाथ मे
फिर जनता को गुमराह क्यूँ किया आपने???????

08. रामलीला मैदान मे भारत माता का फोटो किसके कहने पर हटाया गया और क्युं?????

अगर आपका ये मानना है कि भारत माता कि फोटो लगाने से किसी की भावना आहत होती है तो उन लोगो कि भावनाओं का क्या जिनकी भावनाएँ भारत माँ का फोटो हटाने से आहत हुईं?????

क्या ये वोट बैंक कि राजनीती की शुरूआत करने की आपकी योजना का हिस्सा नहीं था????????

09. कश्मीर पर आपकी पार्टी के कुछ लोग चाहते है जनमत हो क्या ये देशद्रोही कार्य नहीं है??????  अगर हाँ तो ऐसे  लोग आप की पार्टी मे क्यूँ है??????
या आपकी पार्टी का ऐजेंडा भी यही है कि कश्मीर पाक को दे दिया जाये???? स्पष्ट करे

10. शीला दीक्षित को क्लीन चिट की वजह क्या है????  क्यों आपने पहले हर जगह कहा कि आपके पास सबूत है शीला के खिलाफ और अब क्यूँ आप भाजपा से सबूत मांग रहे है

11.आपने कहा कि VIP कल्चर खत्म करोगे फिर स्पेशल मैट्रो ट्रैन से शपथ मे जाना क्या हुआ ? क्या ये VIP कल्चर नहीं है? 

12. आपकी शपथ के लिये जो ट्रैन चलाई गयी चंद लोगो के लिये उसका खर्च कौन अदा करेगा?  आप या आपकी पार्टी???

क्या ये जनता के पैसे का दुरूपयोग नहीं था?

13. आपने कहा कि राजनीति का दलदल साफ करने के लिये उसमें उतरना जरूरी है सही बात है हम भी सहमत है लेकिन CM साफ इन्सान गंदगी की सफाई सबसे पहले अपने घर से शुरू करता है तो क्या आप भी ऐसी ही शुरूआत करोगे??  आपके साथी मनीष शिसोदिया के NGO कबीर पर विदेशी चंदे के आरोप लगे है तो क्या आप सबसे पहले उसकी जाँच कराओगे????? 

14.आपके पास दिल्ली के फुटपाथो पर रहने वाले मेरे कश्मीरी भाईयों के लिये क्या योजना है???  कश्मीर मे उनके घर नीलाम हो रहे तो क्या आपकी सरकार उनके घर बचाने के लिये दखल देगी या नहीं?????

15. जामा मस्जिद के बकाया बिजली बिल की वसूली कब तक कराओगे आप या वोट बैंक के चलते चुप रहोगे???

16. जब बिजली सब्सिडी से ही सस्ती करनी थी तो शब्दो की बाजीगरी का खेल खेलने का क्या औचित्य था????  आप सीधे भी तो कह सकते थे कि हम बिजली पर सब्सिडी देंगे पर आपने कहा सरकार दाम ज्यादा ले रही है हम कम करेंगे ???

17. बिजली पर सब्सिडी से जो नुकसान होगा उसकी भरपायी कौन करेगा????

18. बांग्लादेशी घूसपेठीये जो बहुत बड़ी तादात मे दिल्ली मे अवैध कब्जा जमाये बैठे है अधिकांश तो वोटर ID और राशन कार्ड तक हासिल कर चुके है , उन पर आप क्या कार्यवाही करोगे या फिर वोट बैंक बनाकर पोषण करोगे?????

19. क्या आम आदमी बड़े Duplex बंगले मे रहता है सर?????

20. धारा 370 पर आपका रूख क्या है??

21. समान नागरिक कानून पर आपकी पार्टी का रूख क्या है?

22. बाटला हाऊस एनकाउन्टर पर आपकी पार्टी और आप के बयान के लिये क्या आप माफी मांगोगे???

23. जिस कोंग्रेस के खिलाफ आप चुनाव लड़े जनता ने उसे दिल्ली से बाहर का रास्ता दिखा दिया | जनता ने स्पष्ट
कर दिया हर राज्य मे कि उसे कोंग्रेस कहीं भी नहीं चाहिये किसी भी स्थान पर लेकिन आपने ने उसी कोंग्रेस का अप्रत्यक्ष सहारा लेकर सरकार बना ली | क्या ये जनता के साथ धोखा नहीं है? 

24. दिल्ली की जनता ने आपको और भाजपा को पसंद किया और शायद भाजपा को ज्यादा फिर कोंग्रेस का सहारा लेकर जनसमर्थन को किनारे करना क्या धोखा नहीं है?

25.आज दिल्ली की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है तो क्या आप उसके जिम्मेदार नहीं है?

सवाल तो बहुत है लेकिन फिलहाल आप इतने सवालो के जवाब ही दे दिजिये  |

माननीय CM साहब आप मे हमने एक रोशनी की उम्मीद देखी थी मगर अफसोस कि ये उम्मीद महज 8 दिन मे ही धूमिल पड़ गयी है|

एक बात और CM साहब आप भी अपनी पुर्ववर्ती सरकारों के नक्शे कदम पर ही चल रहे है मुफ्त की बिजली मुफ्त का पानी मुफ्त का राशन|  ऐसी रेवड़ीयां बाँट कर आप वोट बैंक की जड़ो को ही पोषित कर रहे हो|  महोदय मै आम आदमी जरूर हुँ लेकिन मेहनत से कमा कर खाना चाहता हुँ| मुझे मुफ्त की भीख नहीं मेरी मेहनत का हक चाहिये मुझे रोजगार चाहिये मेरा काम करने का हक चाहिये|   बेहतर होगा कि मुफ्त कि रेवड़ी की आदत डालने की जगह आप कुछ ऐसा करते कि लोगो को काम मिलता मेहनत का हक मिलता|   लेकिन आपने अभी तक सिवाय वाहवाही लुटने वाली घोषणाओ के अलावा कुछ नहीं किया जो आगे चलकर राज्य के लिये बेहद खतरनाक साबित होगी |

उम्मीद करता हुँ आप कुछ बेहतर करे|

शक ही नहीं यकिन है कि आप इनमें से मेरी किसी बात का जवाब नहीं दोगे फिर भी शुभकामना देता हुँ कि आप कुछ बेहतर करे| वोटबैंक की राजनीति से अलग हटकर कुछ करके दिखाये ताकि आम आदमी के जो सपने अन्ना और बाबा रामदेव के आंदोलन से जगे वो धुमिल ना हो सके |
आम आदमी बोलता नहीं है लेकिन जब बोलता है तो सैलाब ला देता है | आम आदमी समझता सब है पर सहता रहता है लेकिन जब सहन शक्ति से उपर उठ कर बोलता है प्रतिकार करता है तो इतिहास बदल देता है | तख्त बदल जाते है भुगोल बदल जाता है | आम आदमी को कमजोर समझने या मुर्ख समझने की भुल ना करे आप | आप भी आम आदमी है बेहतर जानते है आम जन की पीड़ा को!

हो सके तो जवाब जरूर दिजियेगा और अगर आप चाहे तो मै रामलीला मैदान मे सार्वजनिक मंच पर आपसे ये सवाल जवाब करने को तैयार हुँ क्योंकि आप ही तो कहते हो कि सब कुछ जनता के सामने होना चाहिये |
मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ है |

धन्यवाद
भारत का आम नागरिक
निखिल दाधीच
03-01-2014